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भ.कृ.अनु.प.– केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान
ICAR - Central Institute for Research on Cotton Technology

आइसीएआर- सिरकॉट, मुंबई में ‘कृषि में नैनोप्रौद्योगिकी के प्रगत अनुप्रयोगों पर आइसीएआर लघु कोर्स’ का आयोजन

‘नैनोटेक्नोलॉजी में प्रगति’ पर प्रशिक्षण की तस्वीर – फरवरी 2026

भाकृअनुप-केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान, मुंबई ने 2-11 फरवरी, 2026 के दौरान ‘कृषि में नैनोप्रौद्योगिकी के प्रगत अनुप्रयोगों’ पर 10-दिवसीय लघु कोर्स आयोजित किया। इस कोर्स को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित किया गया हैं।

इस दस-दिवसीय लघु कोर्स में विभिन्न विषयों जैसे; नैनोमैटेरियल्स का संश्लेषण, विभिन्न लक्षण-निर्धारण तकनीकें, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में अनुप्रयोग के तरीके, फलों और सब्जियों की पैकेजिंग, सूती वस्त्रों की फिनिशिंग, बायो-नैनोकम्पोजिट्स और घाव मरहम ड्रेसिंग, स्मार्ट टेक्सटाइल्स और 3-D प्रिंटिंग, पर्यावरण प्रबंधन और नैनोटॉक्सिकोलॉजी! 

  

‘नैनोटेक्नोलॉजी में प्रगति’ पर प्रशिक्षण की तस्वीर – फरवरी 2026

 

‘नैनोटेक्नोलॉजी में प्रगति’ पर प्रशिक्षण की तस्वीर – फरवरी 2026

 

‘नैनोटेक्नोलॉजी में प्रगति’ पर प्रशिक्षण की तस्वीर – फरवरी 2026

इस प्रशिक्षण में प्रशिक्षुओं द्वारा स्वयं किए जाने वाले व्यावहारिक अभ्यासों पर विशेष जोर दिया गया। इन व्यावहारिक अभ्यासों में नैनोमैटेरियल्स का संश्लेषण और लक्षण-निर्धारण, तथा कृषि, वस्त्र और कम्पोजिट्स के क्षेत्र में उनके अनुप्रयोग शामिल थे।

11 फरवरी, 2026 को आयोजित समापन सत्र के दौरान, डॉ. एन. विग्नेश्वरन, प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख रसा एवं जैव-रसा प्र.वि. और कोर्स निदेशक द्वारा पूरे कार्यक्रम के दौरान आयोजित व्याख्यानों, व्यावहारिक अभ्यासों, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के दौरों और चर्चाओं जैसे विषयों पर एक संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। माननीय डॉ. एस. के. शुक्ला, निदेशक ने कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में नैनो-आधारित प्रौद्योगिकियों को सफलतापूर्वक अपनाने के लिए अनुसंधान में सहयोगात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रशिक्षण आपसी सीखने का एक अवसर प्रदान करता है, जिससे प्रशिक्षकों और प्रशिक्षुओं, दोनों के ज्ञान आधार में वृद्धि होती है।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के अनुसंधान संगठनों और विश्वविद्यालयों से 7 महिलाएं मिलाकर कुल बारह (12) वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों ने सहभागिता की।

2026-02-12T12:00:00
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