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भा.कृ.अनु.प.– केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान
ICAR - Central Institute for Research on Cotton Technology

'खेत बचाओ अभियान' के तहत कोल्हापुर क्षेत्र में भा. कृ. अनु. प. – केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान ने चलाया व्यापक किसान आउटरीच कार्यक्रम

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए राष्ट्रव्यापी "खेत बचाओ अभियान" के भाग के रूप में, भा. कृ. अनु. प. – केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (ICAR-CIRCOT), मुंबई ने 22 से 26 जून, 2026 तक पूरे कोल्हापुर जिले में एक विशाल किसान आउटरीच और जागरूकता अभियान का आयोजन किया।

            यह पांच दिवसीय अभियान पन्हाला, हातकणंगले, करवीर, कागल, शाहूवाड़ी, शिरोल और वालवा-इस्लामपुर ब्लॉकों के 80 से अधिक गांवों में चलाया गया, जिसमें 1,200 से अधिक किसानों ने भाग लिया। ग्राम पंचायत कार्यालयों, सहकारी समितियों, स्थानीय खेतों और कार्यक्रम पंडालों सहित सुलभ स्थानों पर स्थानीय बैठकें आयोजित की गईं। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य प्रबंधन, रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग, जैव उर्वरकों को अपनाने और उत्पादकता व लाभप्रदता बढ़ाने के लिए टिकाऊ, प्राकृतिक खेती के तरीकों के बारे में शिक्षित करना था।

 

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पन्हाला ब्लॉक के यवलुज गांव में 25 जून को डालमिया शुगर प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में आसपास के 20 गांवों के 700 से अधिक किसान शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान, श्री श्रीधर गोसावी (महाप्रबंधक) ने अभियान के विजन को रेखांकित किया, जबकि श्री संतोष कुंभार (यूनिट हेड) ने किसानों, उद्योग और अनुसंधान निकायों के बीच आपसी समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।

            भा. कृ. अनु. प. – केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने उपस्थित लोगों को व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया, जिसमें प्राकृतिक खेती के लिए 'जीवामृत' तैयार करने और मिट्टी के नमूने एकत्र करने की वैज्ञानिक तकनीकों का लाइव प्रदर्शन (सजीव प्रदर्शन) शामिल था। यह अभियान एक संवादात्मक मंच के रूप में भी काम आया जहाँ किसानों ने प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की और विशेषज्ञों से सीधे तकनीकी समाधान प्राप्त किए।

 

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भा. कृ. अनु. प. – केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान की इस आउटरीच टीम में डॉ. मनोज कुमार महावर, डॉ. मनोज कुमार पूनिया, डॉ. शेषराव कौतकर, डॉ. हिमांशुशेखर चौरसिया, श्री उदय कोरे और श्री अमोल निंबालकर शामिल थे। इस कार्यक्रम को कई एग्रो-स्टार्टअप्स का सक्रिय सहयोग मिला, जिनमें साम्राज्य एग्रो इंडिया, डिजिटल खेती, प्रफुल्ल वाइनरी, श्रील सूर्य रिसर्च, सुवर्णभूमि एग्रीकल्चरल मशीनरी, आर्डे पाटिल फार्मा, इंटेगलिया टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस और चिपकु एग्री इनोवेशंस शामिल हैं।

 

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2026-06-29T12:00:00
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