आइसीएआर- सिरकॉट में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस - 2026 का आयोजन
हर वर्ष महिलाओं की सांस्कृतिक, राजनीतिक और सामाजिक-आर्थिक उपलब्धियों को पहचानने और उनका सम्मान करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन होता है। इस वर्ष भी 8 मार्च 2026 को भाकृअनुप- केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान, मुंबई में संस्थान की सभी महिला कर्मचारियों की एक सभा आयोजित की गई।
कार्यक्रम की शुरुआत 'वंदे मातरम' और परिषद गीत के साथ हुई। श्री योगेश पठारे, व. प्रशा.अधि. ने सभी का स्वागत किया और संस्थान की सभी महिला कर्मचारियों को शुभकामनाएं दी। डॉ. टी. सेंथिलकुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक और आंतरिक शिकायत समिति (आई सी सी) के सदस्य ने सभा को समिति की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान, संस्थान की एक कार्मिक, श्रीमती हेमांगी पेडनेकर को परिषद कई पश्चिम क्षेत्र खेल प्रतियोगिता में उनके द्वारा शतरंज में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर, 'महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना' पर एक छोटे वीडियो द्वारा प्रतिभागियों के बीच जागरूकता लायी गयी।
डॉ. प्रतिमा गोयल, संस्थान की आई सी सी की बाहरी सदस्य, ऑनलाइन माध्यम से इस समारोह में शामिल हुईं और सभी क्षेत्रों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और क्षमता पर प्रकाश डाला, विशेष रूप से लैंगिक समानता के महत्व को उजागर किया। उन्होंने संस्थान में एक स्वस्थ और महिला-अनुकूल कार्य वातावरण को बढ़ावा देने और बनाए रखने के लिए निदेशक महोदय की सराहना की।
इसके बाद श्रीमती तृप्ति मोकल, प्रशासनिक अधिकारी, और डॉ. शार्लीन डिसूजा, सहा.मुख्य.तक.अधि. और आई सी सी की सदस्य सचिव के नेतृत्व में इस वर्ष की थीम " सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए अधिकार। न्याय। कार्रवाई। " पर एक चर्चा हुई, जो 'संयुक्त राष्ट्र महिला किसान वर्ष' के संदर्भ में थी। इस चर्चा में भारत में महिला किसानों द्वारा सामना की जाने वाली वास्तविकताओं पर प्रकाश डाला गया, जिसमें यह बताया गया कि भूमि स्वामित्व के मामले में कुल कृषि आबादी में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल लगभग 14% है। वक्ताओं ने इस बात पर भी चर्चा की कि कैसे विरासत कानून कभी-कभी पैतृक भूमि तक पहुँचने में चुनौतियाँ पैदा करते हैं और महिलाओं के अधिकारों को सुरक्षित करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने आगे इस बात पर ज़ोर दिया कि आने वाली पीढ़ियों को शिक्षित करने और समाज को मज़बूत बनाने में महिलाओं का सुशिक्षित होना अहम भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम में उपस्थित विभागाध्यक्षों, डॉ. शनमुगम और डॉ. विग्नेश्वरन ने इस अवसर पर सभी महिला कर्मचारियों को अपनी शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि लैंगिक समानता की सीख व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर से ही शुरू होनी चाहिए; इस बात का समर्थन डॉ. प्रतिमा गोयल ने भी किया। कई कर्मचारियों ने भी अपने विचार साझा किए और "म-हि-ला" शब्द को एक ऐसी महिला के प्रतीक के रूप में बताया जो मज़बूत, हिम्मतवाली और लजवंती (गरिमापूर्ण) है।
अंत में माननीय डॉ. एस. के. शुक्ल, निदेशक ने सभा को संबोधित किया। भारत के इतिहास में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए पौराणिक पात्रों जैसे; द्रौपदी और सीता से लेकर इस्रो की आधुनिक वैज्ञानिकों और देश की सेवा कर रही महिला सैनिकों तक महिलाओं के महत्त्व को उजागर किया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि देश की प्रगति में महिलाएँ हमेशा सबसे आगे रही हैं और राष्ट्रीय विकास को गति देने के लिये महिलाओं के सशक्तिकरण तथा लैंगिक समानता को अग्र स्थान पर रखना चाहिये।
कार्यक्रम का समापन संस्थान के सहायक श्री मयंक चौरसिया द्वारा दिए गए धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।


देश के कपड़ा क्षेत्र में महिला कार्यबल की विविधता
भारत में, कपास की चुनाई का काम मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा किया जाता है; कपास उगाने वाले प्रमुख राज्यों में लगभग 3 लाख महिला श्रमिक कपास चुनने के काम में लगी हुई हैं।
लगभग 1 लाख महिला श्रमिक ओटाई (कपास से बीज निकालने) क्षेत्र में, बिनौला निगरानी, लिंट (रुई) की प्रक्रिया और सफाई जैसे कामों में शामिल हैं।
भारत में कपड़ा निर्माण का एक विशाल क्षेत्र है, जिसमें लगभग 3,400 स्पिनिंग मिलें हैं; इन मिलों में कताई और उससे जुड़े अन्य कामों में लगभग 5 लाख महिलाओं को रोज़गार मिलता है।
वस्त्र निर्माण क्षेत्र में, महिलाएँ कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा हैं; इस उद्योग में कार्यरत कुल 4.5 करोड़ श्रमिकों में से 60% से अधिक महिलाएँ हैं।
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पृष्ठ अंतिम अद्यतन तिथि:14-03-2026 12:08 PM
