भा.कृ.अनु.प.-के.क.प्रौ.अनु.सं. और भारतीय कपास निगम लिमिटेड ने जिनिंग कर्मियों के कौशल विकास हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए
हाल ही में शुरू किए गए महत्वाकांक्षी 'कॉटन प्रॉडक्टिविटी मिशन' (MCP) - मिनी मिशन-II (यानी 'कपास क्रांति') के तहत कस्तूरी कॉटन भारत मानकों के अनुरूप गांठों (बेलों) के उत्पादन को बढ़ावा देकर भारतीय कपास की गुणवत्ता में सुधार पर विशेष जोर दिया गया है। जिनिंग कारखानों में कार्यरत जनशक्ति का कौशल जिनिंग मिलों में संसाधित कपास की गुणवत्ता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। MCP के अंतर्गत देशभर की 2,000 जिनिंग मिलों के 10,000 जिनिंग कर्मियों (जिन प्रबंधकों, पर्यवेक्षकों, ग्रेडरों और फिटरों सहित) के कौशल विकास का प्रावधान है। MCP-MMII की कार्यान्वयन एजेंसी 'द कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) लिमिटेड, मुंबई ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केन्द्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (भा.कृ.अनु.प.-के.क.प्रौ.अनु.सं.), मुंबई में MCP के तहत जिनिंग कर्मियों के लिए कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है, जो भारत में जिनिंग कर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने वाला एकमात्र संस्थान है।
इस संबंध में, MCP-MM-II के तहत जिनिंग कर्मियों के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों के आयोजन हेतु भा.कृ.अनु.प.-के.क.प्रौ.अनु.सं., मुंबई और द सीसीआई लिमिटेड, मुंबई के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। द सीसीआई लिमिटेड के 56वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान 01 अगस्त, 2026 को संभाजीनगर में माननीय केंद्रीय वस्त्र मंत्री, भारत सरकार, श्री गिरिराज सिंह और महाराष्ट्र सरकार के तीन वरिष्ठ मंत्रियों की उपस्थिति में डॉ. एस. के. शुक्ला, निदेशक, भाकृअनुप-सिरकॉट, मुंबई और श्री एल. के. गुप्ता, अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, द सीसीआई लिमिटेड, मुंबई ने MoU पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर श्रीमती पद्मिनी सिंगला, आईएएस, संयुक्त सचिव (फाइबर), वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार; श्रीमती वृंदा देसाई, वस्त्र आयुक्त, भारत सरकार; डॉ. वी. एन. वाघमारे, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईसीआर, नागपुर के साथ-साथ कपड़ा उद्योग, जिनर्स एसोसिएशन, कॉटन ट्रेडिंग आदि के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
माननीय केंद्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने MoU पर हस्ताक्षर करने के लिए दोनों संगठनों को बधाई दी और कहा कि MCP के तहत जिनिंग कर्मियों के तकनीकी कौशल में सुधार से अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप भारतीय कपास की गांठों (बेलों) की गुणवत्ता में सुधार होगा।
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पृष्ठ अंतिम अद्यतन तिथि:03-08-2026 04:43 PM
