भाकृअनुप-सिरकॉट रोगाणुरोधी सुती चादरें

प्रस्तावना:

ग्रैंड व्यू रिसर्च, नि.® की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक रोगाणुरोधी चिकित्सा-वस्त्र बाजार वर्ष 2024 तक 799.7 मिलियन अमरीकी डालर तक पहुंचने की उम्मीद है. जीर्ण बीमारियों की बढ़ती व्यापकता, दुनिया भर में नोसोकोमियल संक्रमणों यानि अस्पतालीय संक्रमण में वृद्धि तथा बेहतर स्वास्थ्य देखभाल तरीकों के प्रति बढ़ती जागरूकता इस पूर्वानुमान अवधि में उत्पाद की मांग को बढ़ावा देती है.

देश में इन उत्पादों की निर्मिति के अभाव के कारण भारत में चिकित्सा कपड़ा क्षेत्र काफी हद तक आयात पर निर्भर है और सभी डिस्पोजेबल स्वच्छता और चिकित्सा वस्त्रों का लगभग 90% आयात किया जाता है (टेक्सटाइल एक्सीलेंस, 2016). मेडिकल टेक्सटाइल के निर्माण में सर्जिकल गाउन, सर्जिकल कैप, सर्जिकल मास्क, कंबल, सर्जिकल होजिअरी आदि का उत्पादन शामिल है.  रेलवे, रेस्तरां, हॉस्टल, अस्पताल आदि जैसे सार्वजनिक स्थानों पर इस्तेमाल होने वाली कपड़ा सामग्री क्रॉस-संक्रमण के मुख्य स्रोत हैं. सूती वस्त्र, हालांकि त्वचा केलिये आरामदेह हैं, इनकी जैविक प्रकृति और उच्च नमी प्रतिधारण क्षमता के कारण रोगजनकों के प्रसार के लिए एक आदर्श सब्सट्रेट के रूप में कार्य करते हैं.  यह न केवल आम व्यक्ति के लिए बल्कि स्वास्थ्य कर्मियों के लिए भी एक बड़ी चिंता का विषय है इसलिए, मेडिकल टेक्सटाइल के उत्पादन के लिए एक स्वदेशी तकनीकी विकसन की आवश्यकता है.

भाकृअनुप-सिरकॉट की प्रौद्योगिकी:

धात्विक लवण, जो इंट्रासेल्युलर प्रोटीन से बंधकर  रोगाणुओं को निष्क्रिय कर के उन्हें मारकर एंटी-माइक्रोबियल गतिविधि को बढ़ाते हैं; पारंपरिक रूप से विभिन्न पॉलीमेरिक एजेंटों के अलावा चिकित्सा वस्त्रों में उपयोग में लाये जाते हैं.  भाकृअनुप-केन्द्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान ने भारत में नैनो प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक अग्रणी कार्य किया है और कपड़ा परिष्करण में नवीन कार्यात्मक गुणविकास हेतु विभिन्न नैनो सामग्री के संश्लेषण और अनुप्रयोगात्मक प्रौद्योगिकियों का विकास किया हैं.  संस्थान ने जिंक ऑक्साइड (नैनो ZnO) के नैनोकणों का उपयोग करके  50 धुलाई चक्रों तक प्रभावकारी रहनेवाले रोगाणुरोधी सूती चादरों के उत्पादन की एक नई प्रक्रिया विकसित की है. रोगाणुरोधी कपास की चादरें 100% सूती कपड़े से बनाई जाती हैं और रोगाणुरोधी और यूवी प्रकाश संरक्षण गुण प्रदान करने के लिए नैनोपरिष्कृत की जाती हैं. यह उत्पाद दो प्रतिनिधि रोगजनकों, क्लेबसिएला न्यूमोनिया और स्टैफिलोकोकस ऑरियस के खिलाफ 99% से अधिक बैक्टीरिया के विकास को रोकता है और अल्ट्रा वायलेट (यूवी) विकिरण को कुशलता से रोकता है.

भाकृअनुप-सिरकॉट रोगाणुरोधी चादरें अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए क्रॉस-संक्रमण के खिलाफ सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत प्रदान करती हैं. यह उत्पाद सर्जरी/आईसीयू/मॅटर्निटी /आर्थोपेडिक/आइसोलेशन और बर्न वार्डों के लिए बेहद उपयुक्त हो सकता है जहां संक्रमण की संभावना अधिक होती है.

भाकृअनुप-सिरकॉट की चादर का प्रभाव

एम एस ग्रीन ग्लोब मुंबई, एक मुंबई स्थित पंजीकृत स्टार्टअप और भाकृअनुप-सिरकॉट –कृषिव्यवसाय सृजनन केन्द्र के पंजीकृत इनक्यूबेटी है और उन्हों ने भारत सरकार के मेक इन इंडिया कार्यक्रम के अनुरूप एंटीमाइक्रोबियल कॉटन बेड शीट के व्यावसायिक पैमाने पर उत्पादन में उद्यम स्थापित किया है. पहला व्यावसायिक उत्पादन मुंबई के अंधेरी स्थित एक प्रसंस्करण इकाई में 100 बेड शीट के लिए किया गया. उपयोग के दौरान और धुलाई के बाद बेडशीट के रोगाणुरोधी गुणों का  प्रदर्शन अखिल भारतीय भौतिक चिकित्सा और पुनर्वास संस्थान ( एआइआइपीएमआर) , मुंबई में किया गया, जो भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत एक शीर्ष संस्थान है. आशाजनक परिणामों के आधार पर, महाराष्ट्र के सांगली के माधवनगर में 2,000 चादरों के लिए बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उत्पादन परीक्षण किया गया. इनक्यूबेटी अब एम्स, नई दिल्ली, आरएमएल अस्पताल नई दिल्ली जैसे प्रसिद्ध अस्पतालों और रेलवे में भी परीक्षण-विपणन और उत्पाद को बढ़ावा दे रहा है. प्रचार और वितरण के लिए इस उत्पाद को केवीआईसी और स्वयं सहायता समूहों से व्यापक स्वीकृति प्राप्त है.

केरल के एक उद्यमी भी इस उत्पाद के लिए निर्यातोन्मुखी बाजार तलाश रहा है.

निष्कर्ष

भाकृअनुप-सिरकॉट की अनूठी तकनीक के साथ तैयार कपास की चादरें जस्ता आधारित हैं और यूवी-संरक्षण क्षमता प्रदान करने के अलावा विविध उपयोगकर्ता क्षेत्रों में क्रॉस-संक्रमण से बचाती हैं.  इस तकनीक का उपयोग करने के लिए लगने वाली अतिरिक्त लागत बेडशीट की कुल लागत के 15% से भी कम है. स्वदेशी रूप से विकसित इस प्रौद्योगिकी के माध्यम से सूती वस्त्र के मूल्य में वृद्धि होगी और आयातित प्रौद्योगिकी / सामग्रियों पर हमारी निर्भरता को कम करने के अलावा हाइ-एंड अनुप्रयोगों के लिए नई दिशा मिलेगी.

समाज को लाभ:

• रोगाणुरोधी सूती चादरों के उत्पादन के लिए स्वदेशी नैनो-आधारित प्रौद्योगिकी

• अस्पतालों, रेलवे, होटलों आदि सहित सार्वजनिक स्थानों पर संक्रमण में कमी

• चिकित्सा वस्त्रों में उनके उपयोग को बढ़ाकर सूती वस्त्रों का मूल्यवर्धन